जब कोई चीज़ गिरती है
तो गिर कर टूट जाती है.
और इक आवाज़ होती है.
लेकिन ऐसा क्यों होता है
जब कोई मानव गिरता है
सब कुछ निःशब्द होता है.
किन्तु गिरने वाले को,
इक विश्वास होता है
कि मानव हर पतन के बाद,
और ऊँचा उठता है.
फिर गिरना,
इतना सहज हो जाता है
कि गिरने पर
न चोट लगती है
न दर्द होता है
और मानव सफलता से दूर
असफलता के करीब होता जाता है
तो गिर कर टूट जाती है.
और इक आवाज़ होती है.लेकिन ऐसा क्यों होता है
जब कोई मानव गिरता है
सब कुछ निःशब्द होता है.
किन्तु गिरने वाले को,
इक विश्वास होता है
कि मानव हर पतन के बाद,
और ऊँचा उठता है.
फिर गिरना,
इतना सहज हो जाता है
कि गिरने पर
न चोट लगती है
न दर्द होता है
और मानव सफलता से दूर
असफलता के करीब होता जाता है
Depends on perception.
ReplyDeleteya we loss our passion due to this thought.
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